शनिवार, 25 अप्रैल 2015

धनतेरस पर कैसे मनायें कुबेर को


प्रयोग-1 कुबेर साधना

 अ ऊँ नमो कुबेराय वैश्रवणाय अक्षय।

 समृद्धि देहि कनक धारायै नम:।।

 प्रयोग विधि- दीपावली की रात्रि से पूर्व त्रयोदशी तिथि से सात हजार रोज मंत्र जाप दीपावली तक (21 हजार जाप स्वर्ण मिश्रित रुद्राक्ष माला से धूप दीप अगरबत्ती जला कर श्रद्धा भाव से करें।

 सिद्ध कुबेर यंत्र को थाली में चावल के ऊपर प्रतिष्ठित कर रखें। रोली, केसर, फल-फूल से पूजा करें। चावल सफेद पोटली में बांधकर तिजोरी में रखें यंत्र भी तिजोरी में रखें।

 लाभ- गोल्ड रत्न ज्वैलरी के काम करने वालों के लिये यह साधना वरदान है। गया धन वापिस आता है। भूमि विवाद दूर होते है। अखण्ड धन लक्ष्मी, राज्य कृपा प्रमोशन की प्राप्ति होती है।

(यदि आप जप करने में सक्षम नहीं है तो हमसे संपर्क करे  | हम आपके नाम से सिद्ध किया हुआ प्राण प्रतिष्ठित कुबेर यन्त्र आपको उपलब्ध करा सकते है )
 प्रयोग-2    कुबेर पूजन नवनिधि दाता कुबेर

 ऊँ श्रीं ऊँ ह्रीं श्रीं ह्रीं

 क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नम:।।

 मनुष्यों, यक्षों गंधर्वों तथा राक्षसों के लिये तथा देवों के लिये भी कुबेर पूजनीय है। कुबेर के पिता विश्रवा तथा माता इडविडा हैं। इनकी सौतेली माता का नाम कैकसी था।

 कुबेर की पत्नी का नाम श्रद्धा तथा दोनों पुत्रों के नाम ‘नल कुबेर’ व ‘नील ग्रीव’ है। कैलाश पर्वत पर स्थित अलकापुरी इनकी राजधानी है। परंतु सर्वप्रथम इनका मूल निवास त्रिकूट पर्वत स्थित विश्वकर्मा द्वारा निर्मित स्वर्ण नगरी लंका थी।

 जैसे देवताओं के राजा इंद्र हैं।– गुरु बृहस्पति है। इसी प्रकार निखिल ब्राह्मांडों के धनाधिपति धनाध्यक्ष कुबेर है। महाभारत में कहा गया है कि महाराज कुबेर के साथ भार्गव-शुक्र तथा धनिष्ठा नक्षत्र भी दिखाई पड़ते हैं। इन तीनों की कृपा के बिना धन-वैभव की प्राप्ति नहीं होती है।
 प्रयोग-3,      ब्राह्मांडों के धनाध्यक्ष अपार धन प्रदाता श्रीकुबेर मंत्र साधना

 यदि कोई व्यक्ति पिछली सात पीढ़ियों से धनाभाव दरिद्रता व अपयश से पीड़ित है तो निम्न मंत्र प्रयोग से जन्मों की दरिद्रता दूर होती है। घर में अपार धन, ऐश्वर्य, संपदा, भवन, आभूषण, रत्न, वाहन, भूखंड व प्रतिष्ठा की प्राप्ति निश्चित होती है।

 भगवान शंकर की पूजा करने के बाद रावण को शूल पाणि शिव ने इस मंत्र का ज्ञान कराया था। इस मंत्र की 11 माला जाप 11 दिन तक नियम से करें। जाप के बाद हवन, तर्पण, मार्जन तथा ब्राह्मण भोजन आवश्यक होता है।

 धूप-दीप जलाकर, फल-फूल व मिष्ठान से भोग लगाकर, श्री कुबेर यंत्र पर चंदन (लाल) कुंकुम का तिलक लगाकर निम्न मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए। एक माला ऊँ गं गमपत्यै नम: का जाप करें।

 कुबेर मंत्र

 विनियोग

 ऊँ अस्य श्री कुबेर मंत्रस्य विश्रवा ऋषि:, बृहती

 छन्द: शिवसखा धनाध्यक्ष देवता, अखंड धन

 लाभ प्राप्यर्थे जपे विनियोग:

 ध्यान

 मनुजवाह्म विमानवर स्थितं

 गरुडरत्न निभं निधिनायकम्।

 शिवसखं मुकुटादि विभूषितं

 वरगदे दधतं भज तुन्दिलनम्।।

 प्रार्थना मंत्र

 देवि प्रियश्च नाथस्य कोषाध्यक्ष महामते।

 ध्यायेSहं प्रभुं श्रेष्ठं कुबेर धनदायकम्।।

 क्षमस्व मम दौरात्म्यं कृपासिंधो सुर:प्रिय:।

 धनदोSसि धनंदेहि अपराधांश्च नाशय।।

 महाराज कुबेर त्वं भूयो भूयो नमाम्यहम्।

 दीनोपि चदया यस्त जायतुं वै महाधन:।।

 मंत्र

 ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय

 धनधान्य अधिपतये धनधान्य

 समृद्धिं में देहि दापय स्वाहा।।

 विषेश-

 यह मंत्र शिवजी के मंदिर में या बेलपत्र के पेड़ के नीचे बैठकर जपने से सिद्धि शीघ्र मिलती है। एक लाख जप करने से इसका पुरश्चरण होता है। दशांश हवन तिल व देसी घी से होता है।

दीपावली के सिद्ध टोटके

" दीपावली " के दिन " अपामार्ग " की जड़ लाये . . और पूजन के पश्चात अपनी दाहिनी भुजा में बाँध ले . . देखिये . . आपकी समस्याए . . .कैसे हल होने लगती है . . . .

 = " दीपावली " के दिन संध्याकाल में पीपल के पेड़ के नीचे साबुत उड़द के दाने और उस पर थोड़ा दही और सिंदूर डालकर चढ़ावे . . . तेल का दीपक जलावे . . .देखिये . . .आपको काफी धन लाभ होगा . . . .

= " दीपावली " के दिन " पांच अभिमंत्रित कोडियों पर हल्दी का तिलक लगाकर " अपने ऊपर से आठ बार उसारकर किसी भिखारी को कुछ पैसो के साथ दान कर दे . . .आपको नौकरी मिलने की समस्या का अंत तुरंत हो जाएगा . . .

= " दीपावली " के दिन प्रातः काल पीपल पेड़ में गुड मिश्रित जल चढ़ावे . . .और दीपक जलावे . . .दीपक में दो लौंग डालना मत भूलियेगा . . . देखिये . . आपकी आर्थिक समस्याओं का अंत . . तुरंत कैसे होता है . . . . .

 = " दीपावली " के दिन जलकुम्भी लाकर पीले कपडे में बांधकर रसोई घर में रख दे . . देखिये . . आपके घर में खाने - पिने की चीजों में कभी कमी नहीं होंगी . . .

= " दीपावली " के दिन अपनी तिजोरी में थोड़े काली गुंजा के दाने ज़रूर डाले . . देखिये . . आपकी तिजोरी में कैसे धन बढ़ता है . . . .

 = " दीपावली " के दिन से प्रतिदिन " श्री सूक्त " का पाठ नियमित करना शुरू करे . . " माँ लक्ष्मी " आपके घर में स्थायी रहना शुरू कर देंगी . . .

दीपावली की रात कहाँ - कहाँ दीपक लगाने से होगी महालक्ष्मी प्रसन्न

शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि दीपावली रात देवी महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। अत: इस रात को देवी को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपाय बताए गए हैं।
 यदि संभव हो तो रात के समय किसी श्मशान में दीपक जरूर लगाएं। पैसा प्राप्त करने के लिए यह एक चमत्कारी टोटका है।

धन प्राप्ति की कामना करने वाले व्यक्ति को दीपावली की रात मुख्य दरवाजे की चौखट के दोनों ओर दीपक अवश्य लगाना चाहिए।

घर के आंगन में भी दीपक लगाना चाहिए। ध्यान रखें यह दीपक बुझना नहीं चाहिए। कभी भी घरमें क्लेश और रोग नहीं होंगे |

हमारे घर के आसपास वाले चौराहे पर रात के समय दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

घर के पूजन स्थल में दीपक लगाएं, जो पूरी रात बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है।

पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक अवश्य लगाकर आएं। ऐसा करने पर आपकी धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

छोटी बड़ी वाहन दुर्घटनाओं को टालने के प्रभावशाली उपाय

यह एक ऎसा सरल उपाय है जिसकेप्रयोग आप सुनिश्चित लाभ की अपेक्षा कर सकते हैं। इस प्रयोग के अन्तर्गत गुरूपुष्य नक्षत्र में शुभ मुहूर्त में निकाली गई अपामार्ग नामक पौधे की जड ले लें। इस पौधे को लटजीरा,आंधाझाडा इत्यादि नामों से भी पुकारा जाता है। इस जड को एक फिटकरी के टुकडे एवं एक कोयले के टुकडे के साथ एक काले वस्त्र में बांधकर उससे वाहन के चारों ओर दाहिने घूमते हुये 7 चक्कर लगायें। यह एक प्रकार का उसारा करने के समान है। इसके पश्चात इस पोटली को वाहन मे कहीं रख दें। ऎसा करने से वाहन दुरात्माओं से रक्षित रहता है तथा उसकी दुर्घटनाओं से भी रक्षा होती है।

जड़ी बूटी के चमत्कारिक प्रयोग



 तंत्र-विद्या में ऐसे कितने ही प्रयोगों का वर्णन है जो प्रबल सम्मोहन शक्ति से संपन्न माने जाते हैं। ध्यान रहे कि दुर्भावना अथवा मात्र कौतूहल के लिए कोई साधना नहीं की जानी चाहिये। तंत्र-मंत्र के प्रयोगों में निजहित की अपेक्षा लोकहित को वरीयता देना श्रेयस्कर होता है। सम्मोहन के प्रभाव: सम्मोहन के प्रभाव में मरीज को क्याहोता है? सबसे पहले उसका सचेतन मन काम करने से हट जाता है और उसके अचेतन मन की दुनिया साकार हो उठती है। डॉक्टर  के पूछने पर मरीज अपने अचेतन मन में छिपी बातों को बताने लगता है। इस प्रकार डाॅक्टर मरीज की बीमारी के उन मनोवैज्ञानिक कारणों को जान पाता है जो उसके अचेतन मन में छिपे हुए होते हैं। मनोवैज्ञानिक  डॉक्टर बीमारियों के इलाज में सम्मोहन का प्रयोग करते हैं। आपरेशन से पहले मरीज के भयभीत होने पर सम्मोहन द्वारा उसके मन को शांति दी जाती है। प्रसूति के समय होने वाली पीड़ा को भी सम्मोहन द्वारा कम किया जा सकता है। बिना किसी शारीरिक नुक्स के हकलाना, लगातार हिचकी आना, उल्टी होना, घबराहट के कारण भूख न लगना आदि ऐसी बीमारियां हैं, जिन्हें दूर करने में सम्मोहन ने बहुत सहायता की है। मानसिक तनाव कम करने में भी यह सहायक सिद्ध हुआ है। अतः डाॅक्टर जितने अरसे के लिए चाहे, मरीज में सम्मोहन पैदा कर सकता है फिर जगाने का सुझाव देकर निद्रा तोड़ भी सकता है। एक या दो घंटे के बाद सम्मोहन का असर जाता रहता है और मरीज खुद ही जाग जाता है। मानवीय विद्युत का यही प्रवाह या प्रभाव परस्पर के आकर्षण में अपना सहयोग देता है। उभरती हुई अवस्था में यही प्रवाह व प्रभाव शरीर के आकर्षण की भूमिका बनकर सामने आता है। उस समय उसका सदुपयोग होने से मनुष्य में ओजस्विता, तेजस्विता, वर्चस्वता आदि गुणों का समुचित विकास होने लगता है। यदि वह विकास नियमित रूप से बढ़ता रहे तो मनुष्य अनेक महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु उस विकास की अनियमितता उसके गुणों में वृद्धि या हानि का कारण भी बन सकती है। यदि वृद्धि होती है तो कोई न कोई असामान्यता परिलक्षित होने लगती है। भीम, अर्जुन, भीष्म, हनुमान, मां काली आदि के महाबली होने का रहस्य विद्युत ऊर्जा की वृद्धि समझनी चाहिये। इसके विपरीत इस ऊर्जा अथवा प्रवाह की हानि मनुष्य को निर्बल और हीन बनाने का कारण बनती है। इस कारण ही मनुष्य अपने अंदर हीन भावना अनुभव करने लगता है जिससे साहस और उत्साह में कमी हो जाती है। इस प्रकार विद्युत शक्ति की न्यूनाधिकता मनुष्य को हीन और श्रेष्ठ बनाने में कारण होती है। शरीर के अंग-प्रत्यंग में विद्युत ऊर्जा की उत्पत्ति में सहायक अनेक उपकरणों के साथ ही रासायनिक पदार्थों की भी कमी नहीं है। रक्त संचार की वह क्रिया इन सभी को संचरणशील रखती है और बिजली उत्पादन का कार्य भी अनवरत चलता रहता है। तांत्रिक प्रयोग सम्मोहन का तांत्रिक प्रयोग हर किसी को करने की अनुमति नहीं है। सम्मोहन के प्रयोग कोई चमत्कार नहीं है। कोई भी व्यक्ति इसे सीख- समझ सकता है परंतु उसी को सीखने की अनुमति मिलनी चाहिए जो द्विज-देव-गुरु भक्त हो और जन कल्याण कार्य करने की भावनाओं से युक्त हो।  सम्मोहन गुटिका: तुलसी की पत्तियां छाया में सुखाकर उन्हें भांग के बीज और असगंध मिलाकर गाय के दूध में पीस लें। भली-भांति पिस जाने पर मिट्टी की गोलियां बना लें। गोली बहुत छोटी-एक -एक रत्ती की होनी चाहिये। गोलियों पर उपरोक्त मंत्र की एकमाला फेरकर उन्हें सिद्ध कर लें और सेवन करें। नियमित रूप से प्रातःकाल एक गोली खाई जा सकती है। इस गोली के प्रयोग से सम्मोहन का प्रभाव उत्पन्न होता है। सम्मोहन कारक टीका सिंदूर, सफेद दूब, नागरबेल का पत्ता मिलाकर पीसें। इस लेप को मंत्र द्वारा शुद्ध करके टीके की भांति लगाने से सम्मोहन प्रभाव उत्पन्न होता है। हरताल और असगंध को केले के रस में पीस कर लेप बनाएं और मंत्र द्वारा शुद्ध कर लें। इस लेप का तिलक लगाने से सम्मोहन का चमत्कार प्रत्यक्ष अनुभव होता है। घी, कुआ व मेढासिंगी और जलभांगरा पीसकर मंत्र द्वारा सिद्ध कर लें। यह सम्मोहन के लिए श्रेष्ठ तिलक है। मदार की जड़ सिंदूर और केले का रस एक साथ पीसकर लेप बनाया जाये, उपरोक्त मंत्र द्वारा प्रभावित करने के बाद इसका प्रयोग सम्मोहन का अद्भुत चमत्कार दिखाता है। सम्मोहन शक्ति का अंजन - मक्खन, अजारस, श्वेतार्क मूल एक साथ पीस लें तथा मंत्र द्वारा शुद्ध-सिद्ध कर लें। यह मंत्र सिद्ध लेप अंजन की भांति आंखों में लगाने से सम्मोहक दृष्टि उत्पन्न करता है। सम्मोहन शक्ति के अन्य प्रयोग: लाल अपामार्ग की टहनी से 6 मास तक दातून करने पर वाणी में सम्मोहन और वचन सिद्धि का प्रभाव उत्पन्न होता है। इसी पौधे की जड़ ले आयें, उसकी भस्म बनाकर दूध के साथ पीने से संतानोत्पत्ति की स्थिति बनती है। स्त्री पुरुष दोनों को पीना चाहिये। इसके बीजों का चावल निकाले। उन चावलों की खीर खाने से भूख मर जाती है। सफेद लटजीरे की जड़ किसी शुभ-मुहूर्त में लाकर पास रखें। यह कल्याणकारी होती है। इसकी जड़ किसी शुभ-मुहूर्त में लाकर पीसें और तिलक करें इस तिलक में वशीकरण की शक्ति होती है। बहेड़ा और अपामार्ग (श्वेत) की जड़ंे लेकर शत्रु के घर में डालने से उसका परिवार उच्चाटन ग्रस्त हो जाता है। विच्छू के डंक मारने पर इसकी पत्ती पीसकर लगा दें विष उत्तर जायेगा। इसकी लकड़ी भी बिच्छू का विष दूर कर देती है। इसकी जड़ का लेप शस्त्र प्रहार से रक्षा करता है। सोंठ की माला पहनने से ज्वर उतर जाता है। श्वेत कनेर की जड़ को दायें हाथ में बांधने से ज्वर शांत हो जाता है। सफेद मदार की जड़ धारण करने से नजर और प्रेत बाधा दूर हो जाती है। सहदेवी पौधे की जड़ के सात टुकड़े करके कमर में बांधने से अतिसार रोग मिट जाता है। सफेद धुंधची की जड़ घिसकर सूंघने और उसे कान पर बांधने से आधा शीशी का दर्द मिट जाता है। सेहुंड की जड़ दांतों तले दबाने से दंतकीट नष्ट हो जाते हैं। लोबान की जड़ गले में बांधने से खांसी दूर हो जाती है। सफेद धुंधुची की जड़ सिर के नीचे रखने से अनिद्रा रोग मिट जाता है। तिल्ली का रोग दूर करने के लिए गले में प्याज की माला पहनना लाभदायक है। कमल के बीज और चावल बकरी के दूध में पीसकर खीर बनायें। यह खीर खाने वालों को चार दिन तक भूख नहीं लगती। सत्यानाशी की जड़ पान में खिलाने से बिच्छू का जहर उतर जाता है। शिरीष वृक्ष के फूलों की माला पहनकर भोजन करने से खुराक बढ़ जाती है

हिमालय के सबसे बड़े रहस्य भैरवी

भैरवी एक ऐसा रहस्य जिसने स्त्री की परिभाषा ही बदल कर रख दी है....आखिर ये भैरवी कौन है....कहाँ से आई है.....लोगों में भैरवी का इतना खौफ क्यूँ.....क्या किसी ने भैरवी को देखा है......भैरवी के अस्तित्व पर है कई सवाल....लेकिन जबाब कोई नहीं था....तो जाहिर है ऐसे में दुनिया की निगाहें उत्तर ढूँढने के लिए हिमालय की सबसे बड़ी रहस्य पीठ कौलान्तक पीठ की ओर नजरें उठा कर सवाल के जबाब की प्रतीक्षा करने लगी.....क्योंकि कभी एक ऐसा समय भी रहा है जब कौलान्तक पीठ के महासाधकों को कुलाचार के लिए विश्व भर में बदनाम कर दिया गया था....ये षड़यंत्र था उन धर्म के कथित ठेकेदारों का जिनकी रोटी और चापलूसी को समाज ने वास्तविकता जानने के बाद बंद कर दिया था.......जो औरत के साधना,पूजा,गायत्री,योग,तंत्र,दीक्षा को नकारने के लिए धर्म ग्रंथों को मनमाने तरीके से तोड़ मरोड़ रहे थे......या तो औरत उनके कहे को मानती या फिर धर्म से ही दूर हो जाने को विवश थी.....ऐसे में कौलान्तक पीठ हिमालय ने जो स्वतंत्रता स्त्री को दी वो इन कथित स्त्री विरोधी धर्माचार्यों को सहन नहीं हुई.....उनहोंने कौलाचारियों के बारे में कुछ ऐसी बातें फैला दी जिससे आम जन मानस उनसे कट जाए....हालाँकि बातें निराधार नहीं थी.....लेकिन सत्य भी नहीं.....कौलान्तक पीठ की तंत्र सधानायों में दीक्षा लेने वाली हर स्त्री को भैरवी कहा जाता है.......जिसका अर्थ होता है.....माँ शक्ति.....शिव की संगिनी माँ पारवती को तंत्र ग्रंथों में भैरवी कह कर ही शिव भी पुकारते हैं.....कोई भी तंत्र मार्गी स्त्री भैरवी और पुरुष भैरव के संबोधन से ही पुकारा जाता है......यहाँ एक बहुत बड़ी कमी थी...वो ये की सनातन मान्यता के अनुसार गुरु शिष्य के बीच विवाह नहीं हो सकता.....और एक ही गुरु से दीक्षित स्त्री पुरुष परस्पर विवाह नहीं कर सकते क्योंकि वे गुरु भाई और गुरु बहन होते हैं......लेकिन कौलान्तक पीठ का तर्क विपरीत था....की स्त्री पुरुष के धर्म गुरु अलग अलग होने के कारण गृहस्थी में तनाव रह सकता है.....इस लिए सबसे पहले उनहोंने दो विपरीत नियमों को स्वीकार किया....महारिशी अगत्स्य जिनको आधा हिमालय कहा जाता है.......के पास समस्या ले जाई गयी और उनहोंने दिया अनूठा समाधान.....की गुरु जो जोगी होता है......भी विवाह करने की पूरी स्वतंत्रता रखता है.....साथ ही जोगने....भैरावियाँ....साधिकाएँ भी गुरु गोत्र में विवाह कर सकती हैं.....लेकिन कुल गोत्र में नहीं......जिसका कारण रक्त का एक होना माना जाता है.......इस प्रकार जब ये सुविधा समाज को मिल गयी तो जाहिर है की कौलान्तक पीठ में साधकों की भीड़ इक्कट्ठा होने लगी......जिस कारण बहुतों से यह सहन न हो सका......प्रचलित कथा के अनुसार कौलाचारियों में एक दिव्य साधिका पैदा हुई जिसका नाम था अपरा भैरवी......जिसने दस महाविद्याओं को सिद्ध कर कौतुक विद्या में महारत हासिल कर ली....और सबसे ऊपर जा बैठी......क्योंकि कौतुक विद्या....जिसे आज कल जादूगरी कहा जाता है........जिसका मूल ट्रिक या चातुर्य होता है...को तत्कालीन लोग भली प्रकार नहीं समझ पाते थे.....इस लिए जब अपरा भैरवी कौतुक दिखाती तो लोग दांतों तले अंगुलियाँ दवा देते.....लोगों के मध्य प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँच चुकी ये जादूगरनी भैरवी किस्से कहानियों में भयंकर रूप धारण करने लगी.....इसके जीवन के एक एक भाग को कहानी में जोड़ा गया......बस यहीं से शुरुआत होती है......भैरवी की.......
ऋग्वेद में सांकेतिक रूप से पञ्च चक्रों का विवरण है.......इन्ही पञ्च चक्रों में से एक है भैरवी चक्र.....ये चक्र दो प्रकार के हैं.....एक चीनाचारा चक्र पूजा और शैवमतीय चक्र पूजा.....हिमालयों में चीनाचारा पूजा लागु हुई.....यहाँ गौर करने वाली बात ये है की चीन,महाचीन हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के दो गांवों का ही प्राचीन नाम है......न की वर्तमान चीन से उसका कोई लेना देना है......इस पद्धिति में पंचमकारों को जोड़ा गया.......बस यहीं पञ्च मकार वो तत्व हैं जिनके कारण सात्विक पंथियों को शोर मचाने का अवसर मिल गया.....लेकिन ये उनकी सबसे बड़ी मूर्खता थी.....क्योंकि उनहोंने भी वास्तविकता से मुह मोड़ लिया......वास्तविकता तो ये थी की हिमाचल......उत्तराँचल......जम्मू कश्मीर.....नेपाल....तिब्बत के बड़े हिस्सों में भयंकर हिमपात होता था.....वहां छः से सात महीनो तक बर्फ गिरी रहती थी.....जिसकारण हरियाली का एक भी पत्ता तक नहीं होता था.....ऐसे में इन क्षेत्रों के लोगो ने एक आसान सा उपाय खोज निकाला और वो था की भेड़ बकरियों को मार कर उनके मांस पर जीवित रहना....और कड़ी ठण्ड और सख्त हवाओं से बचने के लिए आयुर्वेद के कथनानुसार हलकी मदिरा को औषधि के रूप में लेना....जो तब से ले कर आज तक इन क्षेत्रों में प्रचलित है.....यहाँ के बच्चे...महिलाएं....युवा.....वृद्ध....सभी सामान रूप से माँसाहारी हैं और मदिरा का सेवन भी करते हैं.....और तो और पवित्री करण तथा पूजा के लिए भी मदिरा का ही प्रयोग होता है....क्योंकि भैरवी साधिका अपरा भैरवी इन्हीं क्षेत्रों की रहने वाली थी इस लिए लोगों ने कहानियों में जोड़ दिया की भैरवी मांस खाती है.....भैरवी मदिरा पीती है......भैरवी मुर्दे पर बैठ कर करती है साधना.....ये बात बिलकुल ही गलत है......की भैरवी मुर्दे पर बैठ कर साधना करती है......वास्तव में मरे हुए बकरे की खाल......याक नाम के हिमालयन प्राणी की खाल पर बैठ कर भैरव-भैरवी साधना करते थे......याक की सफेद खाल को तंत्र में शव कहा जाता है....जिससे बनी शव साधना.......भैरव-भैरवी पूजा में हस्त मुद्राओं और योग मुद्राओं को जोड़ते है.....इसीलिए मुद्रा शब्द भी जुड़ गया......प्राकृतिक तौर पर भैरवी का चेहरा मंगोलियन था....जैसा की चीन या जापान अथवा तिब्बत की कोई सुंदरी हो.....और इन स्थानों में स्त्री को बहु पति रखने की स्वतंत्रता थी.....सन 2000तक हिमाचल के लाहुल स्पीती जिला चंबा और किन्नौर के कुछ भागों में ऐसे परिवार थे....जिनमे की एक ही औरत के चार पति थे......इन भागों में लिंगानुपात इतना गिर गया था की ऐसी नौबत आन पड़ी थी......इस कारण भैरवी पर सभोग करने का कलंक लगा दिया गया.....यहाँ ये स्पष्ट है कि हर पत्नी अपने पति से सम्बन्ध बनाती है.....तब तो कोई गलत नहीं कहता....भैरवी केवल अपने भैरव से ही सम्बन्ध बनती थी क्योंकि दोनों पति पत्नी ही थे......बस बताने की कला है.....किसी ने कहानी को ऐसे पेश किया की भैरवी आतंक्वादिनी ही लगने लगी......भैरवी को लोक कथाओं ने शीर्ष पर बिठा दिया क्योंकि वे उसके कथित चमत्कारों से डरे हुए थे....लेकिन भैरवी तो एक आम साधिका ही थी....लोगों ने कहा की भैरवी के पास देवी-देवताओं से भी ज्यादा शक्तियां हैं.....धीरे धीरे रहस्य बढ़ता गया....समय के साथ साथ जब भोजन की.....बस्त्रों की उपलब्धता हो गयी तो भैरवी ने ये सब छोड़ दिया....और सात्विक भैरवी प्रकाश में आई.....लोगों ने यहाँ तक कहा कि भैरवी को देखने वाला जीवित नहीं रहता....रात के घुप्प अन्धकार में बाल फिलाये कोई स्त्री जंगल में अकेली दिख जाये तो कमजोर दिल वाला मरेगा ही......इसमें भैरवी का क्या लेना देना......हिमालयों के क्षेत्रों में आज भी कई सात्विक भैरवियाँ हैं.........जिनमे से एक हेमाद्री नाम कि भैरवी का मिलन कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज से सन 1999के अंत में कुल्लू के निकट मणिकरण के पर्वतों पर हुआ....और क्योंकि महायोगी कौलान्तक पीठ के पीठाधीश्वर है.....इस कारण उनको धर्मानुसार विवाह करने कि पूर्ण स्वतंतत्रता हासिल है......हेमाद्री ये बात जानती थी....और ये भी कि महायोगी युग पुरुष बनने के लक्षणों से भरे हैं......इसलिए वो उनके आप पास रहने लगी....लेकिन महायोगी जी का उद्देश्य साधना था न कि विवाह....उनहोंने हेमाद्री को आश्रम जो कि तब शक्ति समुदाय के नाम से हिमाचल के मण्डी जिला में स्थित था आने का निमंत्रण दिया.....बालीचौकी हेमाद्री का कई बार आना हुआ कई लोगो ने उसे देखा है.....वो कोई हवा में उड़ने वाली भैरवी नहीं बल्कि साधारण साधिका थी......अब क्योंकि थी तो भैरवी ही....इस लिए लोगों को डरने के लिए इतना ही काफी था....2005के अंत में हेमाद्री कुल्लू कौलान्तक पीठ आई और महायोगी जी के साथ कई दिनों तक रही...महायोगी जी के हेमाद्री के साथ कई फोटो उपलब्ध हैं.......वो महायोगी जी को बहुत स्नेह करती थी.....और विवाह का प्रस्ताव भी रखा लेकिन महायोगी जी ने किसी कारणवश ये प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया....हेमाद्री भैरवी पिन पार्वती नाम के दर्रे के निकट साधना करने की बहुत इच्छुक थी.....और महायोगी जी उस क्षेत्र के नायक है.....इसलिए महायोगी जी हेमाद्री को ले कर पिन पारवती कि और चले गए जहाँ कई लोगो ने मणिकरण क्षेत्र से आगे उनको देख भी लिया.....महायोगी और हेमाद्री के कई महीनो साथ रहने के कारण लोगों ने फिजूल की कई बाते बनाना शुरू कर दिया....जो कि हमारे देश को बिरासत में मिला है.....किसी के साथ बहन भी जा रही हो तो नजरें लोगों की गलत ही समझती हैं........क्योंकि मनोवैज्ञानिक रूप से वे ही काम कुंठाओं से ग्रसित हैं.......इस कारण महायोगी जी ने उनको मजबूरन आश्रम से चले जाने को कहा.......जिससे हेमाद्री को बहुत दुःख हुआ......बो रोती हुई आश्रम से चली तो गयी लेकिन महायोगी जी को कहा कि हिमालयपुत्र भैरवी होने के कारण मेरा कहीं भी सम्मान नहीं है...लोग जानते ही नहीं कि भैरवी क्या है......तो आप वचन दीजिये कि भैरवी के गुप्त विषय को लोगों तक ले कर आयेंगे.....महायोगी जी ने आश्वासन दिया......हेमाद्री भैरवी के जाने से महायोगी जी भी कुछ दुखी हुए....जिसका कारण भारतीय मानसिकता का इतना बुरा रूप देखना था....फिर भैरवी के विषय पर महायोगी जी ने अपना शोध शुरू किया......और सामने आई सात्विक भैरवी........जो सब बुराइयों से दूर पवित्र साधिका थी......लेकिन समाज और मीडिया के मन से छवि को हटाना जरूरी था.......महायोगी जी ने भैरवी को समझाने के लिए भैरवी साधना के नाट्य रूपांतरण का सहारा लिया.....बस इसी दौरान प्रिंट मीडिया में पहली खबर लगी......लेकिन बहुत ही सुन्दर एवं सटीक......पत्रकारों ने महायोगी जी के शोध को जनता के सामने लाने कि कोशिश की.....लेकिन यही खबर जब इन्टरनेट मीडिया के द्वारा इलेक्ट्रोनिक मीडिया तक पहुंची तो एक बार फिर भैरवी का रूप बदल गया......सात्विक भैरवी फिर से काल भैरवी हो गयी.....शोध कि धज्जियाँ उड़ा दी गयी.....देश के एक प्रतिष्ठित टीवी चैनल ने तो महायोगी जी को और उनके शोद्ध को ही गलत करार दे दिया.......कुल्लू में कार्यरत एक तथाकथित पत्रकार ने पत्रकारिता का गला घोट कर टीवी चैनल के नाट्य रूपांतरण को सच समझ कर समाचार पत्र में विचित्र अंदाज में छाप दिया....कम दिमाग के इस पत्रकार ने जो पत्रकारिता का बलात्कार किया है.....वो सदियों के लिए अमर हो गया....इसके बाद देश के सभी टीवी चैनल भैरवी को बार बार दोहराते रहे.....क्योंकि भैरवी एक औरत है......उनको शायद सत्य से कुछ लेना देना नहीं........ऊपर से वो कथित समझदार लोग जिन्होंने हिमालयन कल्चर देखा ही नहीं......लेकिन भैरवी पर कुर्सियों में बैठ कर टिका टिप्पणी करने लग गए......दिमागी खुजली को मिटाने का अच्छा तरीका मिला गया......इधर महायोगी जी पर हुए झूठे षड़यंत्र के कारण रोष में आ कर आश्रम के कुछ शिष्यों ने महायोगी जी के 3000पन्नो के शोध पत्र को कि जला दिया और इस घटना से दूर रहने का आग्रह करने लगे......लेकिन महायोगी भी महायोगी ही हैं.....उनहोंने कहा देखते है कि झूठ जीतता है या सच.....अभी सात्विक भैरवी पर एक बार फिर महायोगी जी का शोध शुरू हो गया है.....उनका उद्घोष है कि मनहूस और अश्लीलता के आबरण से निकाल कर मैं जगत में सबसे पवित्र भैरवी स्थापित कर दूंगा.....हिमालय के माथे पर लगा कलंक मिट जाएगा....स्त्री को धर्म कि स्वतंत्रता मिलेगी....भैरवी साधिकाएँ गौरवमय जीवन जी सकेंगी.....मीडिया में भी कुछ लोग सच्ची पत्रकारिता करते हैं वो भैरवी का वास्तविक रूप एक न एक दिन जरूर लोगों तक ले कर आयेंगे.....और महायोगी का हेमाद्री को दिया बचन भी पूरा होगा और हिन्दू धर्म के कुत्सित समझे जाने वाले स्वरुप भैरवी को लोग पवित्रता और सम्मान से देवी कि तरह देखेंगे.....स्त्रियों का विरोद्ध धर्म में बंद होगा....स्त्री पुरुष सामान रूप से महासाधानाएं कर सकेंगे...कौलान्तक पीठ ने तो सदियों से नारी को सामान भाव से देखा है....जिसका परामान है कौलान्तक पीठ कि कई परम्पराएँ....जिनमें स्त्रियों को देवी के रूप में पूजा जाता है...एक उदहारण है जिन्दा लक्ष्मी......
देश और सम्प्रदाय में खुशहाली रहे इसके लिए कौलान्तक पीठ.......हिमालय के जंगलों में करता है महालक्ष्मी को जीवित एवं जागृत.....जिसे महालक्ष्मी का महाआवाहन भी कहा जाता है.....जिसमे स्वेच्छा से कौलान्तक संप्रदाय की साधिकाएँ अपने को नामजद करती है कि उनके माध्यम से महालक्ष्मी को बुलाया जाए....चार महीनो तक कड़ी साधना के बाद वो कन्या जिसमें महालक्ष्मी का आवाहन होना है जिसे देवकन्या कहा जाता है....तैयार हो पाती है कि साधना पूरी हो....पूरण सात्विक निति नियमों का पालन सरल नहीं...फिर सारे काम काज के बाद भी एक साल तक बनो में रहना साधना करना आदि आसान नहीं....पर ये प्राचीन मान्यताएं हैं.....जिनका पालन पीठाधीश्वर होने के नाते न चाहते हुए भी महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी को करना ही पड़ेगा....लेकिन कथित बुद्धिबादी ये सब कहाँ देख सकते हैं....जबकि महायोगी नहीं चाहते कि कोई लड़की या स्त्री भैरवी या देवकन्या या लक्ष्मी का रूप धारण करे.....लेकिन सनातन को नकार देना भी उनके बसमें नहीं.....वो केवल तामसिक तत्वों के विरोधी हैं.....बलि प्रथा के सबसे बड़े बिरोधी होने का खामियाजा वो बचपन में ही भुगत चुके हैं.....नशा विरोधी कार्यों के कारण उनको लोग समाजसेवी भी मानते हैं.....लेकिन भैरवी की हकीकत समझाने के लिए....समाज शास्त्र.....खगोल शास्त्र....साहित्य...इतिहास....लोक कथाओं का व परम्पराओं का ज्ञान चाहिए...जो कथित कुर्सी ओर ऐसी धारियों के पास नहीं.....वो तो कुछ किताबों लेखकों या इंटरनेट पर निर्भर हैं.....उनकी हालत देख कर तो उनपर दया आती है पर ज्ञानी होने का अहंकार कहाँ जाता है....इन सबसे सिद्ध होता है कि भैरवी को समझना जहाँ बहुत जटिल हैं....वहाँ महायोगी जी के कार्य काबिले तारीफ है कि वो भैरवी के सबसे शुद्ध रूप को सामने लाने में काफी सफल हुए.....मेरे जीवन का ये सौभाग्य है कि मैं हिमालय के सबसे प्रखर योगी जिनको महाक्रोधी मुद्रानायक भी कहा जाता है...जिसका अर्थ होता है की कृत्रिम क्रोध की मुद्राएँ दिखने वाला......महायोगी चक्र राज सत्येन्द्र नाथ जी महाराज ..जिनकी थाह पाना किसी के बस में नहीं.....जो अपनी प्रशंसा चाहते ही नहीं...बाल्यकाल से तपस्या को प्रमुखता देते हैं....इस सतयुगी योगी के निकट रह कर भी उनको नहीं जाना जा सकता....साधना ही उपाय है.....फिलहाल भैरवी तो परदे से बाहर आ ही गयी....आलोचनाएँ तो महापुरुषों की प्रियातामायें होती हैं....वे ही उनको महान बनती हैं.....भैरवी कुछ सामने तो आई..... लेकिन अभी भी रहस्य तो बना ही है.....

खजाना या गड़ा धन मिलने से पहले कुछ ऐसा होने लगता है


खजाना हर किसी व्यक्ति को नहीं मिल सकता। जिसकी किस्मत में अचानक अपार धन प्राप्त करने के योग हैं वहीं गुप्त खजाना प्राप्त कर सकता है। अचानक धन लाभ होने से पहले आपको किस्मत के इशारे मिलते हैं।
ये इशारे सपने में और खुली आखों से या आसपास होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं के रूप में महसुस होते हैं। धन लाभ के लिए कई तरह के संकेत होते हैं। रावण संहिता के अनुसार सपने, शगुन और स्वर विज्ञान उनमें से एक है।
खास तौर से किन लोगों को महसुस होता है गड़ा धन-
सपने में कुआं देखना भी गड़ा खजाना मिलने का एक संकेत हैं। अगर जमीन में छुपा खजाना आपको मिलने वाला है तो अक्सर आपको सपने में कोई गड्डा, छोटा कुआं या खाई दिखने लगेगी। जमीन में छुपा खजाना अक्सर साफ दिल वाले लोगों को ही मिलता है या उन लोगों को मिलता है जिनके मन में कोई छल, कपट नहीं होता।
कुछ लोगों को पितृ देवता का इष्ट होता है ऐसे लोगों को सपने में अक्सर सफेद सांप या दीपक जलते हुए दिखाई देते हैं और उन लोगों को गड़ा धन या खजाना अचानक मिल जाता है या महसुस होता है।
कुछ खास लोग होते हैं जिन्हे गड़ा धन या खजाना महसुस हो जाता है, ये वो लोग होते हैं जो पैर की तरफ से जन्म लेते हैं यानी जिनके जन्म के समय पहले सिर बाहर न आते हुए पैर बाहर आते हैं।
कैसे निकालें खजाना या गड़ा धन :
गड़ा धन निकानले के लिए सबसे पहले निश्चित करें कि किस जगह धन है। उस जगह को पहले पवित्र करें और उस स्थान की पूजा करें। पुराणों के अनुसार ऐसी जगहों पर विशेष शक्तियों का पहरा होता है। गड़े धन या खजाने की रक्षा नाग लोक करता है। नाग योनी पितृ देवताओं की होती है। पितृ ही गड़े धन की रक्षा नाग के रूप में करते हैं। इस खजानें को बिना पितृ की आज्ञा से नहीं निकालना चाहिए। पहले पितृ देवताओं को खुश करना चाहिए। इसके लिए उनके निमित्त हवन और दान कर के धन
सही उपयोग का संकल्प लेना चाहिए। गड़े धन का बड़ा हिस्सा धर्म-कर्म, दान और पितृ पूजा में लगाने का संकल्प लेना चाहिए।
शुभ तिथि और वार को या किसी खास पर्व, ग्रहों के शुभ संयोग या अपनी कुंडली के अनुसार शुभ दिन निकलवाकर उस दिन गड़ा धन निकालना चाहिए। धन निकालन के पहले होने वाली पूजा भी शुभ तिथि या पितृ की तिथि यानी पंचमी, अमावस्या या पूर्णिमा पर पूजा पाठ करवाना चाहिए। पूजा करवाने के बाद पितृ आपको सपने में दर्शन देते हैं अगर सपने में पितृ देव आपको धन निकालने की आज्ञा दें तो ही धन निकालना चाहिए ।
कहां मिलता है खजाना:
रावण संहिता और वाराह संहिता के अनुसार गुप्त खजाना कहां छिपा होता है? यह मालूम करने के कई उपाय बताए गए हैं। जिस भी स्थान पर अपार धन, सोना-चांदी, हीरे-मोती छिपे या दबे होते हैं वहां सफेद नाग या कोई बहुत पुराना नाग अवश्य दिखाई देता है। इसके अलावा कहीं-कहीं नागों के झूंड भी ऐसे गुप्त खजानों की रक्षा करते हैं। ऐसे नागों का दिखाई देना ही इस बात की ओर इशारा करता है कि उस क्षेत्र में कहीं खजाना दबा हो सकता है।
कईं साल पुराने घरों में खजाना छुपा हो सकता है। ऐसे घरों में जो पितृ के समय से ज्यों के त्यों पड़ें हों या जिन घरो में सालों से कोई खुदाई या नव निर्माण नहीं किया गया हो ऐसी जगहों पर खजाना या गड़ा धन होता है।
पूराने किलें जहां कभी राजा-महाराजा रहा करते थे। खंडहरों में भी खजाना छुपा होता है क्योंकि वहां पर शक्तियों को परेशान करने वाला कोई नहीं होता और इंसानो से दुर इनकी अपनी अलग दुनिया होती है।
जंगलों में भी ऐसे खजाने मिलते हैं क्योंकि पहले के लोग ज्यादातर समय युद्ध में और जंगलों में बीताते थे। धन की रक्षा के लिए वो उसे जमीन में छुपा दिया करते थें और मौत के बाद सांप के रूप में वो उसी जगह बस जाते हैं और धन की रक्ष करते हैं।
कैसे सपने बताते हैं खजाने के बारे में
सांप या नाग :
- अगर आपको सपने में सफेद सांप दिखाई दे तों समझिए आपको अचानक धन लाभ होने वाला है। नाग पितृ देवता के रूप में विचरण करते हैं और योग्य व्यक्ति को सपने में आकर दर्शन देते हैं।
- सपने में सफेद नाग-नागिन का जोड़ा जिस घर में या जिस स्थान पर दिखें उस जगह पर आपके पूर्वजों द्वारा रखा गया गड़ा धन होता है।
फूल-
- अगर सपने में फूल दिखाई दे तो आपको अचानक धन लाभ, खजाना या कहीं से गड़ा धन मिलने का संकेत होता है।
- रावण संहिता के अनुसार आपको सपने में दिखने वाला फूल अगर कमल हो तो ये अचानक कहीं से आपको बड़ा फायदा होने का संकेत है।
- अगर आप सपने में में इन्द्र धनुष के साथ कमल को देखते हैं यानी इन्द्र धनुष दिखे और कमल का फूल आपके हाथ हो तो आने वाले 45 दिनों में ही आपको इस सपने का फल देखने को मिल जाता है। अगर आप सपने में कमल के पत्ते पर भोजन करते हुए खुद को देखते हैं तो आपको आने वाले कुछ ही दिनों में छुपा हुआ धन लाभ होने वाला है।
आभूषण और मंगल चिन्ह
अगर सपने में कलश, शंख और सोने के गहने दिखे तो आपको अचानक धन लाभ होगा। रावण संहिता के अनुसार कलश, शंख और गहने आदि मंगल चीजे सपने तभी आती है जब आप पर लक्ष्मी जी खुश होती है।
पौराणिक ग्रंथों और संहिताओं के अनुसार कुछ सपने ऐसे होते हैं जो जैसे के तैसे सच हो जाते हैं।
- अगर आपको सपने में कोई कन्या जो खुद सोने के आभूषण पहने हुए हो और वो आपको सोने का सिक्का दे तो आने वाले कुछ ही दिनों में आपको इस सपने का फल मिल जाएगा।
- कलश सिर पर रखे हुए अगर कोई कन्या सपने में आपको सिक्का दे या किसी दिशा में इशारा करें तो उस दिशा में आपको गड़ा धन मिलेगा।
हरे पेड़ या पीपल-
- अगर आप सपने में पिपल पर कच्च दुध चढ़ा रहे हैं तो आपको पुर्वजों का धन मिलेगा अगर आपके निवार स्थान वाला पिपल हो तो आपको वहीं धन लाभ होगा लेकिन पिपल नहीं कटवाना चाहिए इससे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
- अगर आपको सपने में पिपल का पेड़ या उस पेड़ पर कोई सफेद कपड़ें में बैठकर आपको किसी दिशा की तरफ इशारा करे तो आपको वहां से धन लाभ होगा।
पानी-
जिस घर, किले या खंडहर में धन छुपा होता है सपने में उसी जगह पर पानी भरा हुआ दिखाई देता है।
उस पानी में खुद को बहते हुए देखना या उस जगह सिर्फ पानी को बहते देखना खजाना या गड़ा धन मिलने का संकेत हैं।
सपने में जिस जगह पर पानी में कमल, शंख और कलश बहते दिखाई दें तो समझें आपको उस जगह से गड़ा धन प्राप्त होने वाला है।
पूराने मंदिर-
अगर आपको खजाना मिलने वाला है तो आपको ऐसे पूराने मंदिरो के सपने आएंगे जो
कई साल पूराने हों। ऐसे मन्दिरों में आपको घंटीयां बजती हुई सुनाई देंगी। ऐसे मन्दिर शिव या नाग देवता के हों तो आपको धन लाभ होने के योग बनते हैं।
- आपको पूरानी भगवान की मुर्तियां या नाग की मुर्तियां जब दिखने लगे तो समझना चाहिए कि धन लाभ होने वाला है।
- ऐसे सपने खास तौर पर पंचमी, अमावस्या या पूर्णिमा को दिखाई दे तो समझना चाहिए सपने का फल जल्दी ही मिलने वाला है।
सफेद हाथी-
अगर आपको सपने में ऐरावत या सफेद हाथी का दर्शन हो तो आपको अचानक धन लाभ होगा। सफेद हाथी आपको जिस जगह दिखे उस जगह ही गड़ा धन होना जानना चाहिए।
सपने में हाथी दांत से बनी चिजें धारण करना भी शुभ स्वपन होता है। ऐसा सपना तभी आता है जब आपको गड़ा धन या अचानक कहीं से धन लाभ के योग होते हैं।
मल और गाली गलौज युक्त झगड़ा-
अगर सपने में आप मल देखें या खुद को शरीर पर मल लगाते देखें तो आपको अचानक धन लाभ होगा।
सपने में खुद को ऐसी जगह देखना जहां मल ही मल हो, ये भी धन लाभ का सपना है।
अगर आप सपने में खुद को गाली-गलौज युक्त लड़ाई में देख रहे हैं, लेकिन सुबह तक गाली-गलौज आपको याद न रहें तो ये भी आपका रूका पैसा आने का संकेत होता है।
नेवला-
रावण संहिता के अनुसार नेवला धन संकेत देने वाला जीव है। अगर आप किसी सुनसान जगह हों या ऐसे जंगल में हो जहां नेवेले अधिक हो तो आपको उस जगह से गड़ा धन जरूर मिलेगा।
अगर किसी पूराने मंदिर, खंडहर या पुराने घर में हो और वहां पर नेवला आपके आसपास रहे तो वहां आस-पास धन गड़ा हुआ समझना चाहिए।
उल्लु-
पक्षी तंत्र के अनुसार उल्लू धन के संकेत देने वाला होता है। जिन जगहों पर गड़ा धन या खजाना होता है। वहां उल्लूूू पाए जाते हैं। तंत्र शास्त्रों में उल्लू को धन की रक्षा करने वाला माना जाता है। उल्लू जिस घर या मंदिर में रहने लग जाए तो समझे उस जगह गड़ा धन या खजाना होगा और जहां उल्लू रहने लग जाते हैं ऐसी जगह जल्दी ही सुनसान हो जाती है।
जिस भी साधक की जो भी समस्या है वह फोन करके पूछे हम कमेंट्स या मैसेज का जवाब नहीं देते कुछ लोग उलटे सीधे कमेन्ट लिख कर लोगों को भ्रमित करते हैं अत: ध्यान रखें कि हम कोई शुल्क नहीं लेते और हमारे द्वारा लिखे जाने वाले उपाय अत्यंत प्रचंड रावण संहिता के उपाय हैं जो हमारे और हमारी १२ पीढ़ियों के द्वारा अनुभूत हैं